RBI Saving account Update:रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सिस्टम और बचत खातों से जुड़े नियमों में हाल ही में कई अहम बदलाव किए हैं, जो आम नागरिकों के लिए लाभप्रद साबित होंगे। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक समावेशन (Financial Inclusion), डिजिटल बैंकिंग का विस्तार, और ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुगम एवं सहज बनाना है।
सबसे बड़ा बदलाव Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) से जुड़ा है। पहले BSBD खाते यानी जीरो-बैलेंस वाले “नो-फ्रिल्स” खाते ग्राहकों को सीमित सुविधाएँ देते थे। लेकिन अब RBI के नए निर्देशों के अनुसार बीएसबीडी खाताधारकों को मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सुविधाएँ भी मुफ़्त दी जाएँगी। इससे जीरो-बैलेंस खाता धारक भी सामान्य बचत खातों जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
RBI ने यह स्पष्ट किया है कि इन खातों को कमतर या सीमित सेवा वाला नहीं माना जाना चाहिए और बैंक इन खातों को रखने वाले ग्राहकों को 7 दिनों के भीतर उनका अनुरोधित बदलाव (जैसे साधारण बचत खाते में रूपांतरण) पूरा करना होगा। इस नई नीति का उद्देश्य डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना है ताकि अधिक से अधिक भारतीय डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग कर सकें।
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बचत खाते खोलने में बच्चों को अधिक आज़ादी
एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब 10 वर्ष और उससे ऊपर के बच्चों के लिए बचत खाते खोले जा सकते हैं, और वे अपने खाते को स्वतंत्र रूप से संचालित करने में सक्षम होंगे। हालांकि कुछ सीमित नियम होंगे जैसे कि ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी नहीं मिलेगी तथा खाते पर जोखिम प्रबंधन के आधार पर डिजिटल सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।
यह कदम खासकर आर्थिक साक्षरता (Financial Literacy) और बचत की आदत डालने के लिए प्रभावी माना जा रहा है। इससे बच्चे समय से पहले बैंकिंग की समझ विकसित कर सकेंगे और अपनी बचत को नियंत्रित करना सीखेंगे।
बैंकिंग में आसान प्रक्रिया: निष्क्रिय खाते सक्रिय करना
RBI ने इनएक्टिव (inoperative) और निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। पुराने नियमों के तहत ऐसे खातों को फिर से चलाने के लिए कठिन केवाईसी (KYC) प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे कई खातों में जमा राशि को निकालना मुश्किल हो जाता था। नए नियमों के तहत बैंक अब किसी भी शाखा या वीडियो-केवाईसी के माध्यम से ऐसे खातों को सक्रिय कर सकते हैं।
मिनीमम बैलेंस नियम पर स्पष्टता
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि बचत खाता पर मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) की आवश्यकता और उसकी राशि का निर्धारण RBI नहीं करता, बल्कि यह निर्णय प्रत्येक बैंक अपनी नीतियों के अनुसार ले सकता है। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग बैंकों में मिनिमम बैलेंस और जुर्माना नियम अलग होंगे, इसलिए ग्राहकों को खाता खोलते समय इन नियमों को ध्यान से समझना चाहिए।
ग्राहकों पर सकारात्मक प्रभाव
ये बदलाव खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल सुविधाओं का विस्तार उन्हें बैंकिंग तंत्र से जोड़ता है, बच्चों के खाते खोलने की स्वतंत्रता उन्हें समय से पहले वित्तीय जिम्मेदारी सीखने में मदद करती है, और निष्क्रिय खातों को पुनः सक्रिय करना ग्राहकों की जमा राशि तक आसान पहुँच सुनिश्चित करता है। कुल मिलाकर, RBI के ये सुधार बचत खातों को अधिक उपयोगी, ग्राहक-अनुकूल और समावेशी बनाते हैं।